Tuesday, 23 March 2021

Osteoporosis and Osteomalacia : Peak Bone Mass

#Peak_Bone_Mass और इसके लाभ:

सुधारा जो बचपन।
बुढापा भी सुधरेगा।।

आपने देखा होगा कि बुढ़ापे में एक हल्की चोट के कारण कूल्हे की हड्डी टूट जाती है, जिसका इलाज ऑपेरशन से होता है। 
आप इस अनुभव से भी गुजरे होंगे। आप मार्केटिस्म की महिमा के कारण किस तरह इस परेशानी से उबरते हैं, या डूब जाते हैं, यह भी आपने अनुभव किया होगा। 

हमारे शरीर में हड्डियां उस पिलर की तरह काम करती हैं, जिस पर हमारा पूरा शरीर का भवन निर्मित होता है, और जो जीवन भर हमारा साथ देता है। देह को शास्त्रों में इसीलिए पुर भी कहा गया है। 

लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस पिलर की मजबूती का उत्तरदायित्व,  हमारे बचपन के खानपान और खेल कूद पर निर्भर करता है। यह कार्य लड़कियों में 18 वर्ष की आयु तक और लड़कों में 20 वर्ष की आयु तक होता है। और उसके बाद अगले 10 वर्षों तक पिलर की मजबूती बढ़ती है यदि उचित खान पान और नियमित एक्सरसाइज किया जाय तो।18 से  20 वर्ष की आयु तक हमारे शरीर मे जितना अधिक मजबूत हड्डी बनती है उसे हम "पीक बोन मास" कहते हैं।इसको आप अपने हड्डी का बोन बैंक भी कह सकते हैं। 

एक निश्चित उम्र के बाद इस बैंक का स्वतः ही क्षरित होने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। क्षरण की गति सभी लोगों में लगभग एक जैसी होती है।  कहने का तात्पर्य यह है कि  जिसका एकाउंट 20 साल की उम्र तक जितना बड़ा और मजबूत होगा, उसका एकाउंट उतने वर्षो तक सुरक्षित रहेगा। 

 इसको ऐसे समझिए कि यह हमारे बैंक एकाउंट में जमा की गयी पूंजी है जो उम्र बढ़ने के साथ साथ स्वतः धीरे धीरे कम होती जाती है। जिसे हम #ओस्टीयोपोरोसिस कहते हैं। विशेष तौर पर महिलाओं में। इसी के कारण ऊपर वर्णित फ्रैक्चर होते हैं जिसे -"Childhood disease with old age Consequences" अर्थात "बचपन की बीमारी, जिसका परिणाम बुढ़ापे में निकलता है", भी कहते हैं। 

डिजिटल एरा में, आने वाले समय में यह बीमारी और भीषण शक्ल लेकर आएगा। आपके बच्चों का  भविष्य आपके हांथों में हैं। उन्हें समझाएँ, और न मानें तो ---?

- Dr Tribhuwan Singh M.S.( Ortho) 
जनहित में प्रकाशित और प्रसारित। 

नीचे एक 25 साल की लड़की के कूल्हे का एक्स रे है। जो इन्हीं लापरवाहियों के कारण प्रायः बिस्तर पर आ गयी थी। लेकिन इस उम्र में होने वाली बीमारी को #Osteomalcia कहते हैं। इसमें सूडो फ्रैक्चर दिख रहा है। लाल सियाही से चिन्हित किया गया है। 

मात्र एक माह की दवा से वह चलने फिरने लायक हो गयी। 
©त्रिभुवन सिंह

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