#डिस्क_प्रोलैप्स : बचाव और सुझाव
रीढ़ की हड्डी को अंग्रेजी में स्पाइन कहते हैं। 33 हड्डियों की गुरिया एक के ऊपर एक रखी रहती हैं। जिनके बीच से स्पाइनल कॉर्ड सुरक्षित रहता है। स्पाइनल कॉर्ड से nerves (बिजली की नसें) निकलती हैं जो हाँथ पैर को ही नियंत्रित नहीं करती वरन पेशाब और मल निष्कासन को भी नियंत्रित करती हैं। दो हड्डियों के बीच एक गद्दी या डिस्क होती है मुलायम। जिसके कारण स्पाइन में लचीलापन सम्भव होता है।
लेकिन इसमें कभी कभी रीढ़ की गद्दी या डिस्क अपने स्थान से खिसक कर पीछे चली जाती है और हांथ या पैर में जाने वाली नसों को, दबाने लगती है जिससे हांथ या पैर में भयानक दर्द होता है। पैर में होने वाले दर्द को मोटी भाषा में #साइटिका कहते हैं।
कभी कभी डिस्क खिसक कर कॉर्ड को दबाने लगती है तो लकवा के साथ मूत्र और मल निष्कासन भी प्रभावित हो जाता है। इसको डिस्क प्रोलैप्स कहते हैं। यह प्रायः गर्दन और कमर के निचले हिस्से में ही होता है - सर्विकल एंड लंबर डिस्क प्रोलैप्स।
डिस्क प्रोलैप्स के 99% मरीज दवा और बेड रेस्ट से ठीक हो जाते हैं। मात्र एक प्रतिशत में सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
लेकिन यदि उसको सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है तो मरीज की दारुण दुर्दशा शुरू होती है। हर व्यक्ति डॉक्टर है हमारे यहां। इसलिए हर व्यक्ति एक्सपर्ट ओपिनियन रखता है इसके बारे मे भी। उसको समाज से लेकर डॉक्टर तक, यदि उचित व्यक्ति के पास न पहुंचा तो, डराने का काम शुरू करतें हैं। ऑपेरशन से लकवा मार जाएगा। और न जाने क्या क्या। आप मुझसे बेहतर जानते होंगे।
लेकिन अब सर्जरी इतनी विकसित हो चुकी है कि यदि इसकी आवश्यकता पड़ती है तो बिना किसी दिक्कत के यह सर्जरी हो जाती है। इसलिए भगवान न करे इसकी आवश्यकता पड़े। पड़े तो तनाव न लें।
डिस्क प्रोलैप्स से बचा भी जा सकता है। लेकिन उसके लिए नियमित व्यायाम - विशेष कर स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ - योगासनों का बहुत अच्छा रोल है। साथ में नियमित रूप से टहलना, कमर की मांशपेअशियों को मजबूत करने की एक्सरसाइज़ आदि आवश्यक हैं। बैठने और खड़े रहने का उचित तरीका - एकदम स्ट्रैट भी काफी बचत करता है। भारी सामान उठाना हो तो झुककर न उठावें। बल्कि बैठकर उठावें।
आज एक पेशेंट आयी जिसकी सर्जरी छ: वर्ष पूर्व किया था। और आज ही एक अन्य पेशेंट की छुट्टी हुयी, जो जयपुर से लेकर प्रयागराज तक अनेकों डॉक्टरों को दिखा चुके थे। मेडिकल टेररिज्म के शिकार हो रहे थे - कि साहब कौन से विधि से कीजियेगा। हमने राय दिया कि आप पहले चार डॉक्टरों का पर्चा लेकर घूम रहे हैं। मैं पांचवां हो गया। एकाध और लोगों को दिखा लीजिये। लेकिन उसके बाद डॉक्टर तय कर लीजिये कि करवाना किससे है। और उसी के ऊपर छोड़ दीजिए। वे गए एकाध डॉक्टर को और भी दिखाए। फिर आकर लेट गए।
आज शकुशल विदा किया।
ॐ
©त्रिभुवन सिंह
Very nice Sir
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